जानिए कैसे एक फेसबुकिये ने नेताओ की चमचागिरी करने वालो पर वायरल पोस्ट लिखी

Ab politics

आज दाता हुकुम जसवंतसिंह जी नहीं रहे ….
कल पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी का जन्मदिन था ….
देश के प्रधानमंत्री मोदी जी ने अपने पूर्ववर्ती शासक मनमोहन जी को जन्मदिन की शुभकामनाएं दी थी ….
मेरी टाइम-लाइन भी गुलजार थी आबाद दी ….
हर दूसरी तीसरी पोस्ट मुझे मेरी टाइम-लाइन पर मनमोहन जी से जुड़ी हुई दिख रही थी …. कोई उनको अंतर्राष्ट्रीय मूक-बधिर दिवस के नाम पर ट्रोल कर रहा था तो कोई वास्तव में उनको जन्मदिन की शुभकामनाएं दे रहे थे ….
कुछ मित्र (अब अमित्र) अपने खानदानी संस्कारों का प्रदर्शन करते हुए 87 वर्षीय वयोवृद्ध मनमोहन जी की मां बहन बेटी को याद कर रहे थे क्योंकि शायद इनके खानदान में इनको मां बाप से यही शिक्षा मिलती है …. जबकि मोदी जी पर कुछ लिखो तो ये प्रजाति प्रधानमंत्री पद की गरिमा की दुहाई देती हैं ….
शाम होते-होते बहुत लंबी पोस्ट्स के माध्यम से मैंने भी मनमोहन जी को बर्थ-डे विश किया था ….
यह संयोग नहीं बाकायदा प्रयोग था ….
अनाड़ी फेसबुकिया नहीं हूं मैं ….
नौसिखिया फेसबुकिया नहीं हूं मैं ….
मैंने अपने निजी एवं सार्वजनिक जीवन में कभी मनमोहन जी को शुभकामनाएं नहीं दी सिवाय कल के ….
उसकी वजह थी ….
गांजा अफीम सिर्फ भांडवुड के भांड नहीं फूंकते है और भी बहुत लोग फूंकते है …. इस प्रजाति को सुबह आंख खुलते ही व्हाट्सएप्प यूनिवर्सिटी पर आईटी-सेल से दिन भर का चरस गांजा सप्लाई कर दिया जाता है ….
फिर यह प्रजाति घूम-घूम के उन मैसेज को कॉपी पेस्ट वायरल फॉरवर्ड करती है ….
ऐसे मूढमगज लोगों को चिन्हित कर के लिस्ट से बाहर करना भी एक वजह थी मेरी कल मनमोहन जी वाली पोस्ट की ….
एक वजह और थी उस पोस्ट को करने की ….
घिसा हुआ फेसबुकिया हूं मैं …. मेरी ये नई आईडी है …. मुझे मेरे फॉलोवर्स कैसे बढ़ाने है मैं जानता हूं …. मुझे मेरे लाइक कमेन्ट्स शेयर्स कैसे बढ़ाने है मैं जानता हूं …. यकीन ना हो तो मेरी कल मनमोहन जी वाली पोस्ट्स के लाइक कमेंट शेयर देख लीजिए …. मित्र-सूची में सोये पड़े मित्र भी ऐसी पोस्ट पर गुफा से निकल आते हैं ….
बहरहाल अब बात दाता हुकुम जसवंतसिंह जी की ….
कल मेरी टाइम-लाइन भाजपाई मित्रों की उन पोस्ट्स से गुलजार थी जो ट्रोलिंग के बहाने ही सही मनमोहन जी को याद कर रहे थे ….
लेकिन ….
आज इन 2014 के बाद कुकुरमुत्ते की तरह उगे भाजपा समर्थकों की टाइम-लाइन विधवा की मांग की तरह सुनसान है ….
इन स्वघोषित देशभक्त हिन्दूवादी बड़के भाजपा मोदीभक्तों ने जसवंतसिंह जी को श्रद्धांजलि देने के लिए 2 लाइन की पोस्ट्स भी नहीं की है ….
वजह ….
इनको राजनीति एवं देश के इतिहास का ककहरा भी नहीं मालूम …. यह सब व्हाट्सएप्प-यूनिवर्सिटी व आईटी-सेल के वैचारिक बौद्धिक बंधुआ खानदानी गुलाम है ….
इस प्रजाति का अपना कोई स्वतंत्र मौलिक चिंतन सोच बौद्धिक क्षमता विचारधारा भी नहीं है …. यह मानसिक गुलाम है जो इस धरती पर बोझ बन के विचरण कर रहे हैं ….
यह प्रजाति दूसरों को देशद्रोही कांग्रेसी गद्दार का सर्टिफिकेट देती है ….
यह वो प्रजाति है जो सरहदों पर हमारे सपूतों की शहादत पर भी 2 लाइन की श्रद्धांजलि पोस्ट नहीं करती है ….
क्योंकि ….
ऐसी पोस्ट्स से उनके वैचारिक बौद्धिक राजनीतिक डिजिटल पप्पा की आभा धूमिल होने का खतरा रहता है ….
जबकि ….
2014 से पूर्व सरहदों पर 1 भी सपूत की शहादत पर यह प्रजाति आसमान सिर पर उठा लेती है ….
सीमा पर शहादत हो तो अब इनकी जीभ तालु से चिपक जाती है इनके मुंह में अमूल श्रीखंड जम जाता है ….
हाँ तो भैया मेरी इस पोस्ट्स का लब्बोलुआब यह है कि ….
मेरी कल मनमोहन सिंह जी के जन्मदिन वाली पोस्ट्स पर खुद को बड़का भाजपाई देशभक्त हिन्दूवादी राष्ट्र्वादी मोदीभक्त साबित करने वालों और मुझे देशद्रोही गद्दार कांग्रेसी कहने वालों की टाइम-लाइन आज जसवंतसिंह जी के अवसान पर विधवा की मांग की तरह सुन्नी है ….
इनकी टाइम-लाइन सपूतों की शहादतों पर भी वीरान रहती है …. उसमें भी ये कूटनीति मास्टरस्ट्रोक तलाश करते हैं ….
हमारे 20 सपूत मरे तो क्या हुआ चीन के 30 पाक के 40 मरे ….
लेकिन अपने 20 भाइयों की शहादत पर उनके परिवार पर टूट पड़ने वाले दुखों के पहाड़ पर यह बात नहीं करेंगे ….
ऐसे दोहरे मापदंड वाले चाटुकारों को कायदे से जूतियाता हूं मैं ….
जसवंतसिंह जी का व्यक्तित्व विराट था वो 2014 के बाद फेसबुक ट्विटर पर कुकुरमुत्ते की तरह उगे भाजपाइयों एवं आईटी-सेल व्हाट्सएप्प-यूनिवर्सिटी के वैचारिक बौद्धिक बंधुआ गुलामों की श्रद्धांजलि के मोहताज भी नहीं है ….
मेरी मित्र-सूची के 95% स्वघोषित देशभक्त हिन्दूवादी राष्ट्र्वादी मोदीभक्त भाजपाई मित्रों जिनको जानता उनका भाजपाई पंच पार्षद भी नहीं है की टाइम-लाइन भले आज वीरान हो …. लेकिन …. राजस्थान के हार्डकोर कांग्रेसियों की टाइम-लाइन भी आज गुलजार है …. जसवंत को लाख वैचारिक विरोध के बावजूद वो भी श्रद्धांजलि दे रहे हैं वह भी बहुत हृदयस्पर्शी संस्मरणों के साथ …. लेकिन 2014 के बाद कुकुरमुत्ते की तरह उगे व्यक्ति-पूजक बौद्धिक वैचारिक गालीबाज भाजपाई आज खामोश थे ….
जसवंतसिंह उस शख्सियत का नाम है जिसने 2014 में भले जीवन का अंतिम युद्ध हारा हो लेकिन अपने स्वाभिमान से समझौता नहीं किया …. राजस्थान की आन बान शान और स्वाभिमान को झुकने नहीं दिया ….
जसवंत 2014 में चुनाव भले हारे थे लेकिन लाखों दिल जीते थे ….
चित्र साभार :- मानवेन्द्र सिंह जी जसोल सुपुत्र आदरणीय जसवंतसिंह जी जसोल के फेसबुक पेज पर आज अपलोड ….
मानवेन्द्र सिंह जी इस तस्वीर पर कैप्शन लिखते हैं ….
अब दोनों साथ है फिर से ….
राजस्थान की अपणायत और रवायत ही यह है कि हम रणभूमियों में शत्रुओं से लड़ते है ना कि शब्दों से उनकी मां बहन एक करते हैं ….
कल मैंने सीना ठोक के मनमोहन जी को जन्मदिन की शुभकामनाएं दी थी ….
आज राजस्थान के कांग्रेसियों ने सीना ठोक के जसवंतसिंह जी को श्रद्धांजलि दी है ….
हम राजस्थानियों की रवायत और अपणायत ही यही है जिसे दो टक्के के वैचारिक बौद्धिक गालीबाज गुलाम नहीं समझेंगे!! ….

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